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Thursday, January 22, 2015

माँ

वो यादें अभी भी हैं ताज़ा
जब लड़खड़ाने पर लेती थी सँभाल,
गिरने नहीं देती थी तुम,
आज भी लड़खड़ाने पर याद आती हो,
माँ , क्योंकि तुम ही हमेशा लेती थी सँभाल,
चलना और दौड़ना भी सीख लिया मैंने,
लेकिन पहला कदम सिखाया था जिसने,
माँ , वो तो तुम ही थी,
आज मैं भी बन गयी हूँ माँ,
लेकिन अब भी उतना ही आती हो याद,
माँ , जब भी मैं लड़खड़ा जाती हूँ ,
क्यूंकि तुम ही सकती हो हमें सँभाल !! 

2 comments:

  1. आह... eyes filled with tears...
    Suprbbb wrote sir

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    Replies
    1. शुक्रिया रेखा सुथार जी..

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