" मम्मी " सुनते ही रत्ना झट से जग गयी और बीमार बेटी का सर सहलाने लगी | शाम से उसे बुखार था और रह रह कर उसे खांसी भी आ रही थी | दवा ला दी थी उसने और वो भी उसका पूरा ध्यान रख रहा था | धीरे धीरे बेटी नींद की आगोश में समा गयी और रत्ना भी उसका हाँथ पकड़े सो गयी |
उसकी आँखों से नींद गायब थी , अचानक उसके कदम घर के किनारे वाले कमरे की ओर बढ़ गए | माँ के खांसने की आवाज़ सुनाई दे रही थी और वो उसे दबाने की भरपूर कोशिश कर रही थी | उसे रत्ना का चिल्लाना याद आ गया कि इनकी खांसी के चलते उसे नींद नहीं आती है | धीरे से उसने खांसी का सिरप उठाया और माँ को उठाकर पिलाने लगा | पता नहीं कब वो माँ का हाथ पकड़े पकड़े सो गया , शायद अपनी गलती सुधारने की संतुष्टि मिल गयी थी |
उसकी आँखों से नींद गायब थी , अचानक उसके कदम घर के किनारे वाले कमरे की ओर बढ़ गए | माँ के खांसने की आवाज़ सुनाई दे रही थी और वो उसे दबाने की भरपूर कोशिश कर रही थी | उसे रत्ना का चिल्लाना याद आ गया कि इनकी खांसी के चलते उसे नींद नहीं आती है | धीरे से उसने खांसी का सिरप उठाया और माँ को उठाकर पिलाने लगा | पता नहीं कब वो माँ का हाथ पकड़े पकड़े सो गया , शायद अपनी गलती सुधारने की संतुष्टि मिल गयी थी |
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