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Saturday, May 23, 2015

अनुत्तरित प्रश्न --

" काश उसने नहीं देखा होता मलिन बस्ती के बच्चों को , दिमाग जैसे संज्ञाशून्य हो गया था उसका । पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तो बनानी ही थी "। 
अब शाम ढलने के बाद उसी पेड़ के सहारे खड़ी थी , जहाँ वो हर शाम जाती थी । मन में विचारों का अंधड़ चल रहा था । एक वो थी जिसे आज तक़ ज़िन्दगी में किसी चीज़ की कमी महसूस नहीं हुई थी और एक वो बच्चे थे जिनकी ज़िन्दगी अभावों का प्रतीक थी । लौट कर उसने माँ से पूछा भी था कि आखिर ऐसा क्यों है , उन बच्चों का क्या कुसूर है जो वे ऐसी नारकीय जिंदगी बसर कर रहे हैं । माँ ने भी जवाब नहीं दिया । 
उसने एक बार आसमान की ओर देखा , जैसे पूछ रही हो कि ये सब क्यों नहीं दिखता तुम्हें । जवाब तो नहीं मिला लेकिन उसके मन में इन बच्चों के लिए कुछ करने की इच्छा पुख़्ता हो गयी । एक नए सबेरे का उदय हो रहा था उसके मन में ।

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