" ये नदी का किनारा , ये शीतल हवा , किसी और दुनियाँ में आ गए हों जैसे " , राहुल बोलते बोलते खो सा गया |
कृति को भी लग रहा था कि कितना सुकून है यहाँ , महानगर के भागमभाग , प्रदूषण और शोर से दूर , एक अलग ही दुनियाँ |
" उस वीतरागी को देखो , अपने स्वान के साथ इन सब से परे कितने मज़े में चला जा रहा है | काश हम भी ऐसी ज़िन्दगी जी पाते "|
" जिम्मेदारियों से भाग कर सुकून की तलाश पलायन कहलाता है कृति | हम तो इस समाज में रह कर परिवार , समाज और इंसानियत के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभा कर ही सुकून पा सकते हैं "|
कृति के मन में जैसे असंख्य कपोत उड़ने लगे , उसे जीवन का मर्म समझ में आ गया |
कृति को भी लग रहा था कि कितना सुकून है यहाँ , महानगर के भागमभाग , प्रदूषण और शोर से दूर , एक अलग ही दुनियाँ |
" उस वीतरागी को देखो , अपने स्वान के साथ इन सब से परे कितने मज़े में चला जा रहा है | काश हम भी ऐसी ज़िन्दगी जी पाते "|
" जिम्मेदारियों से भाग कर सुकून की तलाश पलायन कहलाता है कृति | हम तो इस समाज में रह कर परिवार , समाज और इंसानियत के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभा कर ही सुकून पा सकते हैं "|
कृति के मन में जैसे असंख्य कपोत उड़ने लगे , उसे जीवन का मर्म समझ में आ गया |
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