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Monday, May 25, 2015

पहल--

" फिर उठा लाये ये बासी फ़ल , कितनी बार कहा है कि अच्छी दुकान से ही लाया करो , सुनते क्यों नहीं आप "।
पत्नी की बातों से उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था। वो ठेले वाली बूढी औरत की संतुष्टि भरी मुस्कान के आगे इन सब बातों को कोई तवज़्ज़ो नहीं देता था।
दरअसल उसकी पत्नी को पता भी नहीं था कि उसकी माँ ने भी उसे इसी तरह ठेला लगाकर पढ़ाया था । वो तो उसकी नौकरी लगने के पहले ही चल बसी थी, पर अब वो किसी और बेटे का भविष्य सँवारने की पहल कर रहा था।

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