" ऊँची जात में पैदा होना तो अभिशाप हो गया | सालों साल रगड़ते रहो , कोई प्रमोशन नहीं और एक ये हैं ?
शब्द पिघले हुए सीसे की तरह उसके कानों में उतर रहे थे ।
इतिहास एक बार फिर अपने आप को दोहरा रहा था ।
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शब्द पिघले हुए सीसे की तरह उसके कानों में उतर रहे थे ।
इतिहास एक बार फिर अपने आप को दोहरा रहा था ।
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"पहले तो हमें नौकरी ही नहीं मिलती। अगर मिल भी जाए तो सालों साल रगड़ते रहो, कोई प्रमोशन नहीं। और एक ये हैं।"
"और लो जन्म ऊँची जात में।"
पिघले हुए सीसे की तरह ये शब्द उसके कानों में उतर रहे थे ।
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