कुछ दिन पहले ही उसके पिताजी की अचानक मौत हो गयी और अमेरिका में लगी नयी नौकरी की दिक्कतों के चलते वो कश्मकश में था कि कैसे गाँव पहुंचे | लेकिन फ़ोन पर माँ ने उसकी उलझन दूर कर दी |
और तेरहवीं के दिन उसके यहाँ सारे समाज को भोज नहीं दिया गया , बल्कि हस्पताल की नींव डाली गयी | पिताजी की अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए एक नए परंपरा की शुरुवात हो गयी थी |
और तेरहवीं के दिन उसके यहाँ सारे समाज को भोज नहीं दिया गया , बल्कि हस्पताल की नींव डाली गयी | पिताजी की अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए एक नए परंपरा की शुरुवात हो गयी थी |
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