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Sunday, February 16, 2014

खुशहाली

अरे भाई , कहा जात हउवा सब जने | कौनो मेला लगल हौ का | दुक्खू काका हैरानी में पूछत रहलन सबसे | लेकिन केहु के पास एतना समय नाही रहल की काका के बता सके | फिर अचानक रजना देखा गयल ओनके | रजना भी हाली हाली भागत रहल , लेकिन काका क बात सुन के रुक गयल | 
अरे काका , तूं नाहीं सुनला का ! कौनो आम आदमी क सभा हौ अउर सब लोग कहत हउअन की ओकरे पास सब मुस्किलन क हल हौ | 
अच्छा , तूं एक बात ओनसे पूछ लीहा की गांव से सब लोग शहर काहे भागत हउअन , इहाँ कब खुशहाली आई | कौनो रस्ता अइसन बनवा दें जौन शहर से सबके गांव ले आवे | काका क बात सुन के रजना क कदम रुक गईल |
" पहली बार भोजपुरी में कुछ लिखा है " 

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