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Sunday, February 16, 2014

सामाजिक

देर शाम घर पहुचते ही पत्नी ने बताया कि पड़ोसी क्लर्क चौहानजी के बच्चे का जन्मदिन है | मैंने सोचा कि देर तो हो गयी है लेकिन हो ही लेते हैं और चला गया | वहाँ पर चौबेजी को देख कर सोच में पड़ गया कि आज ये अपने मुहल्ले के इस कार्यक्रम में कैसे आ गए | इतने बड़े अफसर हैं , इन्हे तो शादी वगैरह जैसे बड़े कार्यक्रमों में भी आना अपनी तौहीन लगता था | मैं कुछ निष्कर्ष निकाल पाता कि अचानक एक आवाज कानों में पड़ी " ४ महीने बाद ही रिटायरमेंट है इसलिए अब सामाजिक बन रहे हैं "

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