आप भी ना , फ़िल्म देख कर भी कोई रोता है भला | पत्नी मुझे समझा रही थी , ये अलग बात थी कि उसकी आँखे भी बह रही थी | बहुत संवेदनशील फ़िल्म थी और अपनी भावनाओ पे काबू रखना मुश्किल हो गया था | घर पहुचने पर बेटी ने जैसे ही पूछा कि फ़िल्म कैसी थी , उसकी माँ बोल पड़ी "अरे तुम्हारे पापा तो रो पड़े फ़िल्म देखकर "| मैं उस समय ये कतई जाहिर नहीं होने देना चाहता था कि मैं फ़िल्म देख कर रो रहा था , क्योंकि मैं तो हीरो था उसकी नजर में| लेकिन जब उसने मुझे नजरें इधर उधर छिपाते देखा तो वो कहने लगी " अपनी भावनाओ को जाहिर करने में कैसी हिचक पापा , उन्हें छिपाने में हिचक होनी चाहिए | आप तो मेरे हीरो हैं और हमेशा रहेंगे" | अब मेरी आँखों में फिर से आंसू थे |
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