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Sunday, February 16, 2014

बेटियाँ—


" ये क्या है पापा, आज फिर आप भूखे रह गए पूरे दिन, इतनी भी क्या परेशानियां है ऑफिस में कि खाना भी नहीं खा सकते"|
" पर बेटी, तुम्हे कैसे पता चला कि मैंने खाना नहीं खाया", अपने बैग की ओर देखते हुए मैंने कहा|
" मैंने तो अभी बैग से अपना टिफ़िन निकाला भी नहीं"
" पापा, आपका चेहरा देखते ही मुझे सब पता चल जाता है, खैर चलिए, मैं गरमा गरम नाश्ता लाती हूँ आपके लिए"|
मुझे एकदम से अपनी माँ याद आ गयी| उसे भी मेरा चेहरा देख के सब पता चल जाता था|
बेटी मेरे लिए नाश्ता ला रही थी और मैं सोच रहा था कि कितनी जल्दी बेटियाँ, माँ की जगह ले लेती हैं|

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