" ये क्या है पापा, आज फिर आप भूखे रह गए पूरे दिन, इतनी भी
क्या परेशानियां है ऑफिस में कि खाना भी नहीं खा सकते"|
" पर बेटी, तुम्हे
कैसे पता चला कि मैंने खाना नहीं खाया", अपने बैग की ओर देखते हुए मैंने
कहा|
" मैंने तो अभी बैग से अपना टिफ़िन
निकाला भी नहीं"|
" पापा, आपका
चेहरा देखते ही मुझे सब पता चल जाता है, खैर चलिए, मैं गरमा गरम नाश्ता लाती हूँ
आपके लिए"|
मुझे
एकदम से अपनी माँ याद आ गयी| उसे भी मेरा चेहरा देख के सब पता चल जाता था|
बेटी मेरे लिए नाश्ता ला रही थी और मैं सोच रहा था कि कितनी
जल्दी बेटियाँ, माँ की
जगह ले लेती हैं|
No comments:
Post a Comment