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Sunday, February 16, 2014

डायरी

उसकी डायरी के फटे हुए पन्ने जैसे उसका मजाक उड़ा रहे थे | कॉलेज के दिनों में तमाम रातों की तन्हाईयों के अनाम किस्से उसमे दर्ज थे और समय समय पर वो उनको फिर से जी लेता था | उन्ही पन्नो में से एक पन्ने पर गुलाब के फूलों कि खुश्बू भी समायी थी क्योंकि इस पन्ने पर उसके जिंदगी का सबसे खूबसूरत लम्हा दर्ज था | उस दिन पहली बार उसने उस लड़की को देखा था और रात कि तन्हाईयों में उसका जिक्र डायरी के पन्नो में किया था | अगले कई सालों तक वो पन्ना उसे बार बार पलटने पर मजबूर करता रहा और वो उन सूखे गुलाब कि पंखुड़ियों में उसकी खुश्बू महसूस करता रहा | आखिर कॉलेज ख़त्म हुआ और वो उसको वो सब नहीं कह पाया , जिसको इतने सालों तक वह डायरी पे लिखता रहा था | फिर भी उम्मीद थी कि कभी कह पायेगा लेकिन जब बाजार में उसे चमकती साडी में किसी और के साथ जाते देखा तो डायरी के पन्नो को सम्भालना उसे बहुत कठिन लगने लगा |

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