बात उस समय की है जब हॉस्टल में रहते थे , ग्रेजुएशन की पढ़ाई के समय | एक कमरे में दो चौकियों को मिलाकर डबल बेड बना दिया गया था और उस पर तीन लोग सोते थे | रात को सोते सोते अक्सर २ बज ही जाते थे और सुबह ९ बजे के पहले आँख का खुलना थोड़ा मुश्किल ही होता था |
खैर ऐसे ही किसी रात को आँख लगी लेकिन थोड़ी देर बाद ही लगा कि पैर के अंगूठे में किसी चीज ने काट लिया है | काफी तेज दर्द हुआ तो उठना पड़ा और देखा कि अंगूठे से खून निकल रहा था | गौर से देखने पर एक दांत का निशान भी दिखा और जो एकलौती चीज दिमाग में आई कि शायद सांप ने काट लिया | अब , नींद गायब , रात के ३ बज रहे थे और बाकि दोनों दोस्त खर्राटे भरते हुए सो रहे थे | एक बार सोचा कि उनको जगाया जाये , फिर उनकी नींद देखकर जगाने कि इच्छा नहीं हुई | लेकिन डर भी लगा हुआ था कि सांप ने काटा है तो सुबह तक जाने क्या हो | फिर सोचा कि सो जाते हैं , अगर नींद खुल गयी सुबह तो ठीक , नहीं तो कोई बात ही नहीं | इसी उधेड़बुन में करीब एक घंटा बीत गया और नींद ने अपने आगोश में ले ही लिया |
सुबह आँख खुली , अपने को ठीक पाया , अंगूठे में दर्द तो था लेकिन काफी कम | फिर अचानक दिमाग में आया कि सांप कैसे हॉस्टल के थर्ड फ्लोर के कमरे में आ सकता है , शायद किसी छछूंदर ने काटा होगा , और फिर अपने ख्याल पर तरस आया कि ये छोटी सी बात रात में दिमाग में क्यों नहीं आई |
खैर ऐसे ही किसी रात को आँख लगी लेकिन थोड़ी देर बाद ही लगा कि पैर के अंगूठे में किसी चीज ने काट लिया है | काफी तेज दर्द हुआ तो उठना पड़ा और देखा कि अंगूठे से खून निकल रहा था | गौर से देखने पर एक दांत का निशान भी दिखा और जो एकलौती चीज दिमाग में आई कि शायद सांप ने काट लिया | अब , नींद गायब , रात के ३ बज रहे थे और बाकि दोनों दोस्त खर्राटे भरते हुए सो रहे थे | एक बार सोचा कि उनको जगाया जाये , फिर उनकी नींद देखकर जगाने कि इच्छा नहीं हुई | लेकिन डर भी लगा हुआ था कि सांप ने काटा है तो सुबह तक जाने क्या हो | फिर सोचा कि सो जाते हैं , अगर नींद खुल गयी सुबह तो ठीक , नहीं तो कोई बात ही नहीं | इसी उधेड़बुन में करीब एक घंटा बीत गया और नींद ने अपने आगोश में ले ही लिया |
सुबह आँख खुली , अपने को ठीक पाया , अंगूठे में दर्द तो था लेकिन काफी कम | फिर अचानक दिमाग में आया कि सांप कैसे हॉस्टल के थर्ड फ्लोर के कमरे में आ सकता है , शायद किसी छछूंदर ने काटा होगा , और फिर अपने ख्याल पर तरस आया कि ये छोटी सी बात रात में दिमाग में क्यों नहीं आई |
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