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Saturday, July 26, 2014

सावन

"क्या मौसम है , चारो तरफ कीचड़ ही कीचड़ , घर से निकलना मुश्किल । सारे कपडे ख़राब हो गए", दीप्ती का बड़बड़ाना चालू था ।
सच में माँ , बड़ा ख़राब मौसम है ये बारिश का , बाहर निकलो तो एक तो कपड़े ख़राब हो जाते हैं और दूसरे जल्दी सूखते भी नहीं । बेटी ने भी हाँ में हाँ मिलायी ।
उधर गांव में किसान बारिश को देखकर हर्षित हो रहा था कि फ़सल नहीं सूखेगी और प्रार्थना कर रहा था कि बरखा रानी , जरा जम के बरसो । पेड़ों पर झूले पड़े हुए थे ,बारिश में भींगते हुए भी लड़कियाँ झूल रही थीं और कही रेडियो पर गाना बज रहा था "सावन के झूले पड़े" । 

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