आज अचानक बेटा अपने बीबी बच्चों सहित गांव पंहुचा तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। कहाँ तो बुलाने पे भी कोई न कोई बहाना बना देता था और अगर आया भी तो अकेला और उसी दिन वापस।
" दादा दादी के पैर छुओ बच्चों" , और बहू ने भी झुक के पैर छुए दोनों के। फिर बहू ने लाड़ दिखाते हुए कहा " क्या बाबूजी, आप कितने दुबले हो गए हैं, लगता है माँ आपका ध्यान नहीं रख पाती, अब आप लोग हमारे साथ ही चल कर रहिये"।
"हाँ, हाँ, क्यों नहीं, बिलकुल अब आप लोग चलिए हमारे साथ, क्या रखा है अब यहाँ", बेटा भी कहने लगा और माँ के पास बैठ गया।
ये क्या हो गया है इनको, इतना परिवर्तन कैसे हो गया, समझ नहीं पा रहे थे बाबूजी कि अचानक अख़बार की खबर का ध्यान आ गया। उसके गाँव के बगल से बाईपास ( सड़क) निकल रहा था और अब वहाँ की जमीनों के दाम कई गुना बढ़ गए थे।
" दादा दादी के पैर छुओ बच्चों" , और बहू ने भी झुक के पैर छुए दोनों के। फिर बहू ने लाड़ दिखाते हुए कहा " क्या बाबूजी, आप कितने दुबले हो गए हैं, लगता है माँ आपका ध्यान नहीं रख पाती, अब आप लोग हमारे साथ ही चल कर रहिये"।
"हाँ, हाँ, क्यों नहीं, बिलकुल अब आप लोग चलिए हमारे साथ, क्या रखा है अब यहाँ", बेटा भी कहने लगा और माँ के पास बैठ गया।
ये क्या हो गया है इनको, इतना परिवर्तन कैसे हो गया, समझ नहीं पा रहे थे बाबूजी कि अचानक अख़बार की खबर का ध्यान आ गया। उसके गाँव के बगल से बाईपास ( सड़क) निकल रहा था और अब वहाँ की जमीनों के दाम कई गुना बढ़ गए थे।
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