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Saturday, July 26, 2014

दुर्भाग्य-

समय से बड़ा कोई नहीं होता शायद | इतने प्रतिभाशाली छात्र की ये दशा होगी , किसने सोचा था | दसवी की परीक्षा में पूरे जिले में उसका स्थान था | लेकिन उसके बाद उसे पढ़ने के लिए आपने क़स्बे से बाहर जाना पड़ा | 
घर की माली हालत के मद्देनजर दूर के एक रिस्तेदार के यहाँ रुक के पढ़ाई करने का प्रयास करने लगा | नयी जगह में मुश्किलें तो आ रही थी लेकिन उसका ध्यान आपने लक्ष्य और माँ पिताजी के सपनो पर था | बाक़ी सब तो ठीक था लेकिन उस घर का लड़का पढ़ने में बिलकुल गया गुजरा था | उसके पिताजी अक्सर उसके सामने इसकी खूब तारीफ करते और अपने पुत्र को कोसा करते | ये भला उसकी माँ को कैसे गवारा होता और वो अंदर ही अंदर उससे जलने लगी |
परीक्षा बिलकुल सर पे आ गयी थी और वो पूरी मेहनत से पढ़ाई में लगा था । एक दिन जब वो कॉलेज से आया तो उसके कमरे में सब कुछ बिखरा पड़ा था , किताबें और नोट्स सब फ़टे पड़े थे | सारा कसूर एक कुत्ते पर डाल दिया गया , कि उसी ने ये किया । वो संज्ञाशून्य हो गया , क्या करे कुछ समझ नहीं आ रहा था । आखिरकार किसी तरह से उसने परीक्षा तो दी लेकिन एक विषय में फेल हो गया । और जिस दिन रिजल्ट आया , उसी दिन वो अपना मानसिक संतुलन खो बैठा ।

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