नया लेखन - नए दस्तखत के मित्रों , इंतज़ार की घड़ियाँ समाप्त हुयी | इस सप्ताह पिछले बार के विजेता अर्चना तिवारी जी ने चित्र दिया था | इस बार का चित्र एक अलग थीम पर था , आधुनिकता और विकास का प्रतीक एक मॉल का चित्र था | बड़ी प्यारी प्यारी कहानियां आयीं इस बार | मज़ा आ गया , एक ही चित्र पर इतने लोगों की अलग अलग कल्पनायें , बड़ा शानदार अनुभव रहा | सबको बधाईयां और धन्यवाद सहभागिता के लिए | उम्मीद करतें हैं की आगे भी इसी तरह से सहभागी बनते रहेंगे आप सब | नए लोगों का दस्तक देना और उनका लेखन वाक़ई काबिलेतारीफ है |
इस बार भी विजेता कहानी का चयन बहुत कठिन रहा , क्योंकि अधिकांश कहानियां बहुत उम्दा थीं लेकिन इस बार जिस कहानी को अर्चना तिवारी जी , योगराज प्रभाकर जी और विनय कुमार ने सबसे अच्छा पाया वो कहानी जी की है | बहुत बेहतरीन कहानी लिखी हैं इन्होने | एक परिवार के माध्यम से इन्होने न सिर्फ गांव के हाट / बाजार और आधुनिक मॉल की बहुत अच्छी तुलना की और इस अंधाधुंध उपभोक्तावाद और चमक दमक पर एक प्रश्नचिन्ह भी लगा दिया | बहुत बहुत बधाई संध्या तिवारी जी | इस सप्ताह कुछ और कहानियां भी बहुत ही उम्दा थीं ।
और अब अगले सप्ताह कहानी का चित्र संध्या तिवारी जी प्रस्तुत करेंगी .
शुक्रिया अर्चना तिवारी जी , योगराज प्रभाकर जी और नीलिमा शर्माजी..
संध्या तिवारी जी की कहानी --
इस बार भी विजेता कहानी का चयन बहुत कठिन रहा , क्योंकि अधिकांश कहानियां बहुत उम्दा थीं लेकिन इस बार जिस कहानी को अर्चना तिवारी जी , योगराज प्रभाकर जी और विनय कुमार ने सबसे अच्छा पाया वो कहानी जी की है | बहुत बेहतरीन कहानी लिखी हैं इन्होने | एक परिवार के माध्यम से इन्होने न सिर्फ गांव के हाट / बाजार और आधुनिक मॉल की बहुत अच्छी तुलना की और इस अंधाधुंध उपभोक्तावाद और चमक दमक पर एक प्रश्नचिन्ह भी लगा दिया | बहुत बहुत बधाई संध्या तिवारी जी | इस सप्ताह कुछ और कहानियां भी बहुत ही उम्दा थीं ।
और अब अगले सप्ताह कहानी का चित्र संध्या तिवारी जी प्रस्तुत करेंगी .
शुक्रिया अर्चना तिवारी जी , योगराज प्रभाकर जी और नीलिमा शर्माजी..
संध्या तिवारी जी की कहानी --
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