इस देश में गांधीजी से जुड़े सभी स्थलों को देखने की इच्छा है और कभी किताबों में पढ़ा हुआ " फीनिक्स आश्रम " , जिसको महात्मा गांधी ने १९०४ में स्थापित किया था , को भी देखने की तमन्ना थी | यह आश्रम सन १९८५ के दंगो में क्षतिग्रस्त हो गया था और इसका नाम बम्बई रख दिया था | बाद में २७ फरवरी २००० में इसे पुनः चालू किया गया | फीनिक्स सेट्लमेंट ट्रस्ट ने भारत सरकार कि मदद से यहाँ गांधीजी के घर को पुनः स्थापित किया और यहाँ क्लीनिक एवम एड्स सेंटर इत्यादि शुरू किया |
इसके पहले भी दो बार डरबन गया लेकिन वहां नहीं जा पाया था , इसलिए इस बार सोच रखा था कि वहां जाएंगे | शाम को करीब ४ बजे फुर्सत मिलने के बाद मैंने ड्राइवर से कहा कि फीनिक्स चलना है , तो वो मुझे आश्चर्य से देखने लगा | मैंने पूछा कि क्या हुआ तो वो बोला कि शाम के समय , वो भी शुक्रवार को ( जब यहाँ वीकेंड शुरू हो जाता है ) , वहां जाना खतरनाक है | मुझे लगा वो शायद बहाना बना रहा है तो मैंने वहां के कुछ भारतीय लोगों से पूछा , तो उनका भी यही जवाब था |
कहीं कुछ चुभा कि गांधीजी , जो अहिंसा के पुजारी थे , के आश्रम में शाम के समय जाना खतरनाक है यहाँ | समय कम था क्योंकि वापसी का टिकट लिया हुआ था सो वापस आना पड़ा | लेकिन शीघ्र ही जाकर देखना है कि क्यों लोग उस जगह पर शाम को जाने में कतराते हैं | क्यों अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले बापू के आश्रम का क्षेत्र भी हिंसा से अछूता नहीं है ?
इसके पहले भी दो बार डरबन गया लेकिन वहां नहीं जा पाया था , इसलिए इस बार सोच रखा था कि वहां जाएंगे | शाम को करीब ४ बजे फुर्सत मिलने के बाद मैंने ड्राइवर से कहा कि फीनिक्स चलना है , तो वो मुझे आश्चर्य से देखने लगा | मैंने पूछा कि क्या हुआ तो वो बोला कि शाम के समय , वो भी शुक्रवार को ( जब यहाँ वीकेंड शुरू हो जाता है ) , वहां जाना खतरनाक है | मुझे लगा वो शायद बहाना बना रहा है तो मैंने वहां के कुछ भारतीय लोगों से पूछा , तो उनका भी यही जवाब था |
कहीं कुछ चुभा कि गांधीजी , जो अहिंसा के पुजारी थे , के आश्रम में शाम के समय जाना खतरनाक है यहाँ | समय कम था क्योंकि वापसी का टिकट लिया हुआ था सो वापस आना पड़ा | लेकिन शीघ्र ही जाकर देखना है कि क्यों लोग उस जगह पर शाम को जाने में कतराते हैं | क्यों अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले बापू के आश्रम का क्षेत्र भी हिंसा से अछूता नहीं है ?
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