दीवाली एक ऐसा त्यौहार है जिसका जिक्र आते ही बच्चे तो बच्चे , बड़े भी उतने ही उत्साहित हो जाते हैं | घरों की सफाई , रंग रोगन , नए कपड़े , मिठाईयां और रौशनी , सब कुछ तो जुड़ा है इसके साथ | महीनों पहले से तैयारी शुरू हो जाती है और सब तरफ उत्सव का माहौल नज़र आता है | इस घर में भी कुछ ऐसा ही माहौल था , सबसे ज्यादा खुश था मोनू , उम्र सिर्फ ९ साल लेकिन उत्साह में किसी से कम नहीं |
आख़िरकार दीवाली का दिन भी आ गया | मोनू नए कपड़े पहन कर बहुत खुश था , पूरा दिन सजावट करने में लगा रहा और शाम को घूमने जाने का प्रोग्राम भी पहले से तंय था | शाम होते होते घर जगमगाने लगा , चारो तरफ झालर , दिए और मोमबत्ती की रौशनी झिलमिला रही थी | मोनू अब बाहर जाने के लिए मचलने लगा और आखिर सब लोग तैयार हो गए शहर की सजावट और रौशनी देखने के लिए |
सब लोग कार में सवार हुए और चल पड़े रोशनियों से आँख मिचौली खेलने | मोनू बहुत प्रसन्न था , इतनी सारी रौशनी देख रहा था और उसकी ख़ुशी में सभी शरीक थे | कुछ देर घूमने के बाद एक दुकान पर कार रुकी और सब लोग उतरे | मिठाई और चाट की दुकान थी और सारे अपनी पसंद के हिसाब से ले कर खाने लगे | मोनू ने भी चाट लिया और खाने लगा | अचानक उसकी निगाह दूर के एक लड़के पर पड़ी जो नीचे गिरे दोनों में से खाने के लिए कुछ ढूँढ रहा था | मोनू के हाँथ रुक गए , अब वो खा नहीं पा रहा था | उसकी निगाहें आश्चर्य से उस लड़के को ही देख रहीं थी , वो समझ नहीं पा रहा था कि ये बच्चा आखिर नीचे गिरे हुए में से क्यों खा रहा है | संभवतः आज तक उसने कभी ऐसा दृस्य नहीं देखा था | थोड़ी देर बाद सब लोग वापस कार में सवार हो गए और पूरा शहर घूम कर वापस घर पहुंचे | लेकिन अब मोनू के चेहरे से वो ख़ुशी काफूर हो चुकी थी |
घर पहुँच कर मोनू गुमसुम था , लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया | सबको लगा कि शायद थका है इसलिए ऐसा लग रहा है | लेकिन जब वो देर तक गुमसुम रहा तो श्याम को लगा कि जरूर कोई बात है | श्याम ने जब पूछा तो पहले तो उसने जवाब नहीं दिया , लेकिन बार बार पूछने पर भरी आँखों से बोल पड़ा " वो बच्चा नीचे का गिरा हुआ क्यों खा रहा था , क्या उसके घर पर कोई नहीं था जो उसे खिला पिला सके , उसे घुमा सके , नए कपड़े दिला सके " | उसके सवाल ने श्याम को हतप्रभ कर दिया , इतनी कम उम्र में इतनी गंभीर सोच | देखा तो उसने भी था उस बच्चे को , लेकिन उसे क्यों नहीं चुभा ये , वो ख्याल उसके मन में क्यों नहीं आया | वो सोचने लगा कि हम लोग इन सब चीजों के प्रति संवेदनहीन हो गए हैं , अब कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता हमें |
खैर , श्याम ने उसे समझा बुझा कर शांत किया , लेकिन उसका मन अशांत था | आज मोनू ने उसकी आँखें खोल दी थी , जो वो महसूस कर रहा था , अब कुछ कुछ वो भी महसूस कर रहा था |
अगले दिन रविवार था , श्याम ने मन ही मन निश्चय कर लिया था कि वो फिर उसे लेकर उसी दुकान पर जायेगा | शाम को उसने मोनू से कहा कि चलो घूम कर आते है तो वो तैयार हो गया | जैसे ही वो लोग उसी दुकान पर पहुंचे , मोनू की निगाह उस बच्चे को ढूंढने लगीं | श्याम ने भी निगाह दौड़ाई और थोड़ी दूर पर वो बच्चा दिख ही गया |
श्याम कार की तरफ बढ़ा और उसने नए कपड़े का पैकेट और मिठाई का डब्बा निकाला और मोनू को पकड़ा दिया | मोनू ने एक बार उसकी तरफ देखा और फिर वो दौड़ कर उस बच्चे के पास पहुँच गया | मोनू ने जब उसे डब्बे पकड़ाए तो एकबारगी वो बच्चा भी हैरान रह गया | उसे तो लोगों के दुत्कार की ही आदत थी , उसे भी कोई कुछ दे सकता है , ये उसकी कल्पना से परे था | कुछ देर तक तो वो डब्बे को हाथ में लेकर खड़ा रहा और फिर उसकी आँखें ख़ुशी से चमकने लगीं | उसने एक बार मोनू की ओर देखा और डब्बे लेकर अपने घर की ओर दौड़ पड़ा | मोनू उसी तरफ टकटकी लगाये देखता रहा , जब तक वो आँखों से ओझल नहीं हो गया |
पर अब मोनू के चेहरे पर जो ख़ुशी नज़र आ रही थी , वो शायद श्याम को कभी नहीं दिखी थी | लेकिन अब श्याम को यक़ीन हो गया था कि आगे चलकर मोनू कम से कम एक बेहतर और संवेदनशील इंसान तो जरूर बनेगा |
आख़िरकार दीवाली का दिन भी आ गया | मोनू नए कपड़े पहन कर बहुत खुश था , पूरा दिन सजावट करने में लगा रहा और शाम को घूमने जाने का प्रोग्राम भी पहले से तंय था | शाम होते होते घर जगमगाने लगा , चारो तरफ झालर , दिए और मोमबत्ती की रौशनी झिलमिला रही थी | मोनू अब बाहर जाने के लिए मचलने लगा और आखिर सब लोग तैयार हो गए शहर की सजावट और रौशनी देखने के लिए |
सब लोग कार में सवार हुए और चल पड़े रोशनियों से आँख मिचौली खेलने | मोनू बहुत प्रसन्न था , इतनी सारी रौशनी देख रहा था और उसकी ख़ुशी में सभी शरीक थे | कुछ देर घूमने के बाद एक दुकान पर कार रुकी और सब लोग उतरे | मिठाई और चाट की दुकान थी और सारे अपनी पसंद के हिसाब से ले कर खाने लगे | मोनू ने भी चाट लिया और खाने लगा | अचानक उसकी निगाह दूर के एक लड़के पर पड़ी जो नीचे गिरे दोनों में से खाने के लिए कुछ ढूँढ रहा था | मोनू के हाँथ रुक गए , अब वो खा नहीं पा रहा था | उसकी निगाहें आश्चर्य से उस लड़के को ही देख रहीं थी , वो समझ नहीं पा रहा था कि ये बच्चा आखिर नीचे गिरे हुए में से क्यों खा रहा है | संभवतः आज तक उसने कभी ऐसा दृस्य नहीं देखा था | थोड़ी देर बाद सब लोग वापस कार में सवार हो गए और पूरा शहर घूम कर वापस घर पहुंचे | लेकिन अब मोनू के चेहरे से वो ख़ुशी काफूर हो चुकी थी |
घर पहुँच कर मोनू गुमसुम था , लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया | सबको लगा कि शायद थका है इसलिए ऐसा लग रहा है | लेकिन जब वो देर तक गुमसुम रहा तो श्याम को लगा कि जरूर कोई बात है | श्याम ने जब पूछा तो पहले तो उसने जवाब नहीं दिया , लेकिन बार बार पूछने पर भरी आँखों से बोल पड़ा " वो बच्चा नीचे का गिरा हुआ क्यों खा रहा था , क्या उसके घर पर कोई नहीं था जो उसे खिला पिला सके , उसे घुमा सके , नए कपड़े दिला सके " | उसके सवाल ने श्याम को हतप्रभ कर दिया , इतनी कम उम्र में इतनी गंभीर सोच | देखा तो उसने भी था उस बच्चे को , लेकिन उसे क्यों नहीं चुभा ये , वो ख्याल उसके मन में क्यों नहीं आया | वो सोचने लगा कि हम लोग इन सब चीजों के प्रति संवेदनहीन हो गए हैं , अब कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता हमें |
खैर , श्याम ने उसे समझा बुझा कर शांत किया , लेकिन उसका मन अशांत था | आज मोनू ने उसकी आँखें खोल दी थी , जो वो महसूस कर रहा था , अब कुछ कुछ वो भी महसूस कर रहा था |
अगले दिन रविवार था , श्याम ने मन ही मन निश्चय कर लिया था कि वो फिर उसे लेकर उसी दुकान पर जायेगा | शाम को उसने मोनू से कहा कि चलो घूम कर आते है तो वो तैयार हो गया | जैसे ही वो लोग उसी दुकान पर पहुंचे , मोनू की निगाह उस बच्चे को ढूंढने लगीं | श्याम ने भी निगाह दौड़ाई और थोड़ी दूर पर वो बच्चा दिख ही गया |
श्याम कार की तरफ बढ़ा और उसने नए कपड़े का पैकेट और मिठाई का डब्बा निकाला और मोनू को पकड़ा दिया | मोनू ने एक बार उसकी तरफ देखा और फिर वो दौड़ कर उस बच्चे के पास पहुँच गया | मोनू ने जब उसे डब्बे पकड़ाए तो एकबारगी वो बच्चा भी हैरान रह गया | उसे तो लोगों के दुत्कार की ही आदत थी , उसे भी कोई कुछ दे सकता है , ये उसकी कल्पना से परे था | कुछ देर तक तो वो डब्बे को हाथ में लेकर खड़ा रहा और फिर उसकी आँखें ख़ुशी से चमकने लगीं | उसने एक बार मोनू की ओर देखा और डब्बे लेकर अपने घर की ओर दौड़ पड़ा | मोनू उसी तरफ टकटकी लगाये देखता रहा , जब तक वो आँखों से ओझल नहीं हो गया |
पर अब मोनू के चेहरे पर जो ख़ुशी नज़र आ रही थी , वो शायद श्याम को कभी नहीं दिखी थी | लेकिन अब श्याम को यक़ीन हो गया था कि आगे चलकर मोनू कम से कम एक बेहतर और संवेदनशील इंसान तो जरूर बनेगा |
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