एकदम से खूंटे से बंधी गइया छटपटाने लगी, लगा खूंटा उखाड़ लेगी| अँधेरा छाने लगा था, रग्घू तुरंत खटिया से उठा और गाय की तरफ बढ़ा| उसने सोचा मच्छर ने काटा होगा, उसको सहला दे| पास बैठी लक्ष्मी भी सोच में पड़ गयी कि क्या हो गया गइया को| वो भी उठने जा रही थी कि उसकी नज़र पड़ी दूर से आते बछड़े पर| उसके लाख मना करने पर भी हफ्ते भर पहले ही हाँक दिया था रग्घू ने उसको, आखिर बछड़ा था, किसी काम का नहीं था|
रग्घू देखे जा रहा था, कितने प्यार से चाट रही थी गइया अपने बछड़े को| उसने लक्ष्मी की ओर देखा, उसकी आँख भर आयी थी| उसे याद आया, आज एक हफ्ता हो गया था बेटे को गए और उसने कोई फोन तक नहीं किया था| बहू को यहाँ आना पसंद नहीं था और इस बार साफ़ कह दिया था उसने कि यहाँ वापस नहीं आएगी|
रग्घू ने गइया के बगल वाला छोटा नाँद साफ़ किया और उसमे थोड़ा हरा चारा डाल दिया| फिर वो लौट कर खटिया पर आया और लक्ष्मी का हाथ पकड़ कर बोला "अब नहीं भगाएंगे बछड़े को, गइया कितनी खुश है आज"| लक्ष्मी ने एक बार उसकी ओर देखा और जाकर बछड़े का चेहरा सहलाने लगी| आँसू के दो बूँद उसकी आँखों से बछड़े के चेहरे पर टपक गए और उसके आँसुओं में मिल गए|
रग्घू देखे जा रहा था, कितने प्यार से चाट रही थी गइया अपने बछड़े को| उसने लक्ष्मी की ओर देखा, उसकी आँख भर आयी थी| उसे याद आया, आज एक हफ्ता हो गया था बेटे को गए और उसने कोई फोन तक नहीं किया था| बहू को यहाँ आना पसंद नहीं था और इस बार साफ़ कह दिया था उसने कि यहाँ वापस नहीं आएगी|
रग्घू ने गइया के बगल वाला छोटा नाँद साफ़ किया और उसमे थोड़ा हरा चारा डाल दिया| फिर वो लौट कर खटिया पर आया और लक्ष्मी का हाथ पकड़ कर बोला "अब नहीं भगाएंगे बछड़े को, गइया कितनी खुश है आज"| लक्ष्मी ने एक बार उसकी ओर देखा और जाकर बछड़े का चेहरा सहलाने लगी| आँसू के दो बूँद उसकी आँखों से बछड़े के चेहरे पर टपक गए और उसके आँसुओं में मिल गए|
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