"अरे तुम रो रहे हो, बस इतनी सी बात पर| पहले वाले मास्टर तो कितना मारते भी थे लेकिन तुम तो कभी नहीं रोये", रग्घू उसको बहुत अचरज से देख रहा था|
उसने रग्घू की ओर देखा और अपने आंसू पोंछ लिए| आज नए मास्टर ने उसको बहुत तेज डांटा था और कहा था कि अगर पढ़ने लिखने में सुधार नहीं किये तो कोई जरुरत नहीं है स्कूल आने की| और फिर उसे बुलाकर अपने पास बैठाया और समझाया था उन्होंने| बहुत अजीब था यह उसके लिए, उसने तो यही सोचा था कि ये भी छड़ी निकाल कर पीटेंगे और भगा देंगे कक्षा से|
"पता नहीं क्यों चले आते हैं ये सब पढ़ने, आखिर में तो वही करना है तो बाप दादा करते हैं", पिछले कुछ मास्टरों की कही बात उसके दिमाग में घूम रही थी| बाकी लड़के भी तो उसके साथ कहाँ रहते थे, एक रग्घू को छोड़कर|
"तुम नहीं समझोगे यार, कम से कम नए मास्टर ने हमको इंसान तो समझा, ये उसी के आंसू हैं", कहना तो चाह रहा था लेकिन दिल में बहते हुए भावनाओं के सैलाब ने कहने नहीं दिया|
उसने रग्घू की ओर देखा और अपने आंसू पोंछ लिए| आज नए मास्टर ने उसको बहुत तेज डांटा था और कहा था कि अगर पढ़ने लिखने में सुधार नहीं किये तो कोई जरुरत नहीं है स्कूल आने की| और फिर उसे बुलाकर अपने पास बैठाया और समझाया था उन्होंने| बहुत अजीब था यह उसके लिए, उसने तो यही सोचा था कि ये भी छड़ी निकाल कर पीटेंगे और भगा देंगे कक्षा से|
"पता नहीं क्यों चले आते हैं ये सब पढ़ने, आखिर में तो वही करना है तो बाप दादा करते हैं", पिछले कुछ मास्टरों की कही बात उसके दिमाग में घूम रही थी| बाकी लड़के भी तो उसके साथ कहाँ रहते थे, एक रग्घू को छोड़कर|
"तुम नहीं समझोगे यार, कम से कम नए मास्टर ने हमको इंसान तो समझा, ये उसी के आंसू हैं", कहना तो चाह रहा था लेकिन दिल में बहते हुए भावनाओं के सैलाब ने कहने नहीं दिया|
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