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Thursday, June 12, 2014

कसम

भागते भागते किसी तरह टिकट की खिड़की पर पहुंचा , घड़ी देखी तो सिर्फ १० मिनट बाकि थे ट्रेन चलने में | उफ़्फ़ , इतने सबेरे भी इतनी भीड़ , कभी तो सुकून हो जिंदगी में , जब देखो तब भीड़ और भागमभाग | टिकट लेता तो ट्रेन छूटना तंय था , इसलिए लपक कर ट्रेन में चढ़ गया | चढ़ते ही ट्रेन चल दी , किसी तरह एक सीट पर टिका और साँस पर काबू पाने लगा |
पहला मौका था बिना टिकट सफर का , दिल बुरी तरह धड़क रहा था | एक बार पुरे डिब्बे में नजर दौड़ाया , सब लोग अब सोने का उपक्रम करने लगे थे | वैसे भी सुबह के पांच ही बजे थे और जाड़े का समय था तो सब लोग सिकुड़े हुए थे |
उसने भी सोचा कि सो जाये लेकिन नींद तो गायब थी | निगाहें बार बार हर आने वाले व्यक्ति को देख रही थी और सोच रही थी कि पता नहीं कब टी टी आ जाये| पता नहीं कितनी बार सफर किया है इसी ट्रेन में और हर बार तुरंत नींद आ जाती थी लेकिन आज गायब थी | अब वो पूरे डिब्बे को गौर से देखने लगा , चारो तरफ तमाम विज्ञापन चिपके हुए थे लेकिन उन्हें पढ़ने में भी दिल नहीं लगा |
कई स्टेशन पार हो गए , हर स्टेशन से चलते ही दिल धड़कने लगता था कि शायद इस बार टी टी चढ़ेगा डिब्बे में | पहली बार पता चला की कितने स्टेशन आते हैं रास्ते में | जब बेचैनी बहुत बढ़ जाती तो स्टेशन पर रुकते ही गाड़ी से उतर जाता और गाड़ी चलने पर ही चढ़ता | आज प्रतीत हो रहा था कि ट्रेन कितनी धीमी चलती है |
लोगों के खर्राटे उसका दिल जला रहे थे और लगता था कि जैसे उसे छोड़ कर पूरी ट्रेन ने नींद की गोली ले रखी हो | मैगज़ीन बैग में रखी थी लेकिन निकालकर पढ़ने का दिल नहीं किया | समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे सभी इतने बेफिक्र सो रहे थे |
खैर , ख़ुदा ख़ुदा करते मंजिल पर पहुंचे , छह घंटे का सफर हफ़्तों के समान लगा| स्टेशन से बाहर निकलने के बाद कसम ली कि फिर कभी बिना टिकट नहीं चढ़ेंगे ट्रेन में |

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