बहुत पछतावा हो रहा था उन्हें अपनी सोच और व्यवहार पर| समझ नहीं पा रहे थे कि कैसे उतरेगा ये बोझ उनके सीने से| जिस बच्चे को उन्होंने नालायक और निकम्मा समझा था और जिसे घर से भी बेरुखी से दूर कर दिया था, आज इतनी बड़ी मुसीबत में वही काम आया| माताजी की आँख से अश्रुधारा अविरल बह रही थी और पिताजी भी खामोश खड़े थे, पश्चात्ताप उनके चेहरे से भी साफ़ झलक रहा था|
ग्लानि से उन्होंने अपने हाथ बेटे की ओर जोड़ दिए|
" माता पिता के हाथ जब भी उठें, आशीर्वाद देने के लिए उठें, हाथ जोड़ने के लिए नहीं, कहते हुए उसने पिता के जोड़े हुए हाथों को अपने सर पे रख लिया|
उनकी सारी ग्लानि आंसुओं में बह गयी और उन्होंने उसे सीने से लगा लिया|
ग्लानि से उन्होंने अपने हाथ बेटे की ओर जोड़ दिए|
" माता पिता के हाथ जब भी उठें, आशीर्वाद देने के लिए उठें, हाथ जोड़ने के लिए नहीं, कहते हुए उसने पिता के जोड़े हुए हाथों को अपने सर पे रख लिया|
उनकी सारी ग्लानि आंसुओं में बह गयी और उन्होंने उसे सीने से लगा लिया|
No comments:
Post a Comment