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Thursday, June 12, 2014

फैसले

जिंदगी में कुछ फैसले ऐसे भी लेने पड़ते हैं जो उस वक्त कठिन लगते हैं | नयी नयी नौकरी लगी थी विकास की और ट्रेनिंग में लोगों से उसकी नजदीकी बढ़ रही थी | कहने को तो ये ट्रेनिंग सेंटर के छात्रो का हॉस्टल था जिसमे मानसिक रूप से बुद्धिजीवी लोग रहते थे , और जिनसे ये उम्मीद कि जा सकती थी कि वो लोग समाज के बीच की खाई को कम करने का प्रयास करेंगे | लेकिन कुछ ही दिनों में ये स्पस्ट होने लगा कि जो चीजे लोगों को बचपन से रटाई जाती हैं वो एक तरह से उनके खून में रच बस जाती हैं और उनसे ऊपर उठना इतना आसान नहीं होता | पढ़ाई करके नौकरी पा लेना और ज्ञान पाना दो अलग अलग चीज होती हैं |
उसने कभी ये नहीं सोचा कि साथ वाले का सरनेम क्या है , वो सिर्फ उसका बैचमेट था , लेकिन ये भी महसूस होने लगा था कि कई अलग ग्रुप किसी खास आधार पर बनने लगे थे | कुछ लोग उससे ज्यादा ही नजदीकी बढ़ाने लगे थे और इन सारे लोगो का सरनेम मिलता जुलता था | कही न कही ये गलत लगा विकास को और उसका मन इसके विरोध में खड़ा हो गया | उनमे से कुछ बहुत अच्छे और प्रतिभाशाली भी थे लेकिन उसने एक बड़े लछ्य के लिए इस छोटे ग्रुप का हिस्सा बनने से इंकार कर दिया था | उस फैसले पर आज भी उसे फक्र है |

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