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Thursday, June 12, 2014

विडम्बना

अरे भाई , क्या बात है , बड़ी भीड़ लगी है कनिया के घर के सामने , मैंने सामने से आ रहे जोखन से पूछा | " आप को नहीं पता , बेचारा आज अल्लाह को प्यारा हो गया " | मैं एकदम से हतप्रभ रह गया | कब हो गया ये और मुझे खबर तक नहीं |
कनिया हमारे गांव का नाई था , पिछले २५ सालों से मैं उसे देखता आ रहा था | उसकी एक आँख गड़बड़ थी जिससे लोग उसे कनिया ही पुकारते थे | किसी को भी , यहाँ तक की उसे खुद अपना सही नाम याद नहीं था | हर जाति और धर्म के लोगों के घर जा कर लोगों के बाल काटना , दाढ़ी बनाना ही उसका पेशा था | उसके पिता भी इसी पेशे में थे और शायद उसकी पिछली कई पुश्तें यही करती आ रही थीं | बड़ा ही खुशमिजाज , सारे गांव की खबर उसके पास होती थी | बाल कटवाते कटवाते पूरे एरिया की खबर मिल जाती थी | इधर उसका काम थोड़ा कम हो गया था क्योंकि नई पीढ़ी के नौजवान अब उसके बदले नए सैलून में जाना पसंद करते थे | लेकिन अभी भी पुरानी पीढ़ी का वही नाई था और कैची और उस्तरा ही उसके औजार थे जिसे वो चमड़े पर घिस घिस कर तेज करता रहता था |
जल्दी से मैं उसके घर के सामने पहुंचा और पूछने लगा कि कैसे हुआ | तभी उसके पड़ोसी ने बताया कि वो टिटनेस से मर गया | दरअसल वो उस्तरे से अपनी दाढ़ी बना रहा था और कट जाने के कारण उसे टिटनेस हो गया | वक़्त की विडम्बना कि वह अपने ही उस्तरे की वजह से ही काल का ग्रास बन गया |

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