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Wednesday, June 25, 2014

फादर्स डे

अरे मिश्राजी , आज का दिन याद हैं आपको | 
क्या खास हैं आज , मुझे तो याद नहीं आ रहा , आप ही बताईये |
आज तो फादर्स डे है , आप भूल गए | 
लेकिन आपको कैसे याद रहा , इस वृद्धाश्रम में तो कोई आता भी नहीं और आपके बच्चे भी तो आये नहीं थे |
हाँ मेरे बच्चे तो नहीं आये थे लेकिन बाहर चलिए , कुछ बच्चे आये हुए हैं हम लोगों को इस दिवस की शुभकामनाएँ देने के लिए |
मिश्राजी के चेहरे पे मुस्कान आ गयी | तुरंत उठे , कुर्ता डाला शरीर पर और बाहर आ गए | बाहर हाल में कुछ बच्चे आये हुए थे , और टेबल पर फल , मिठाईयां और कुछ फूल भी रखे हुए थे | वहां के लगभग सारे बुजुर्ग हाल में इकठ्ठा थे और सबके चेहरे पर मुस्कराहट खिली हुई थी | लेकिन उस मुस्कान के पीछे छुपा हुआ दर्द भी हर कोई महसूस कर रहा था |

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