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Thursday, June 12, 2014

कश्मकश

रज्जो सुनो तो , सूरज पुकार रहा था लेकिन रज्जो ने अनसुना कर दिया | सूरज परेशान हो गया , पता नहीं क्या हो गया है इसको | पिछले एक हफ्ते से न तो मैसेज का जवाब दे रही है , न ही कॉल का | सब ठीक ठाक तो चल रहा था फिर ऐसा क्यों कर रही है ये ?
रज्जो भी कश्मकश में थी कि कैसे बताये सूरज को कि क्या हुआ है | कुछ दिन पहले ही जब वो नहा रही थी , उसका फोन मम्मी ने देखा और उसके और सूरज के मेसेजेस पढ़ लिए | फिर तो तूफान उठ गया घर में | मम्मी ने चिल्लाना शुरू कर दिया " अब ये भी यही करेगी , सारे गलत काम हमारे बच्चों को ही करने हैं " | उसे काटो तो खून नहीं था , कुछ नहीं बोल पायी वो | अब उसकी क्या गलती थी कि उसकी चचेरी बहन ने घर से भाग कर शादी कर ली थी |
रात में खबर पापा के पास पहुंची और पापा ने उसे बुलाया | वो चुपचाप गर्दन झुकाये खड़ी थी , और पापा के शब्द उसका कलेजा छलनी कर रहे थे | उन्होंने साफ कह दिया कि अगर उसने तुरंत सूरज से सम्बन्ध नहीं तोड़े तो वो अपनी आगे की जिंदगी जेल में भी बिताने के लिए तैयार हैं |
रज्जो पूरी रात सोचती रही कि क्यों औरों की गलतियों की सजा किसी और को भुगतनी पड़ती है और क्या अपने निजी सुख के लिए अपने परिवार को तहस नहस करना उचित है | अंत में उसने परिवार की ख़ुशी के लिए अपने निजी सुख को भुलाना ठीक समझा |

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