वक़्त कभी नहीं ठहरता , किसी के लिए भी नहीं , चाहे हम जो भी कर लें | अभी कुछ दिनों पहले तक ही कितना खुशनुमा माहौल था , और आज ये सन्नाटा , सचमुच वक़्त नहीं ठहरता |
एक औसत इन्सान की जिंदगी कुछ छोटी छोटी खुशियों और बड़े बड़े मुश्किलात के बीच हिचखोले खाती रहती है | जब ग़म का समय होता है तो समय ही नहीं बीतता , और खुशियों के पल तो सचमुच पल समान ही होते हैं , कब उड़ जाते हैं , पता ही नहीं चलता | वो भी एक आम इन्सान ही था , पढ़ाई पूरी होने के बाद छोटी सी नौकरी मिल गयी थी तो लगा दुनियाँ जहान की खुशियां मिल गयी हैं | फिर शादी हुई और पहले बच्चे के आने की आहट सुनाई देने लगी | बड़े खुश थे वे , तमाम कल्पनायें कर रहे थे बच्चे के बारे में , नाम क्या रखेंगे , कहाँ पढ़ाएंगे , वगैरह , वगैरह |
आखिर वो दिन भी आ गया और हस्पताल पहुंच गए वे दोनों | रात आँखों में ही बीत गयी और सुबह एक प्यारे से बच्चे का आगमन हुआ उनकी दुनियाँ में | खुशियों का पारावार नहीं रहा उस समय , लेकिन कुछ घंटो बाद भी जब बच्चा सुस्त ही पड़ा रहा तो उन्हें चिंता हुई | डॉक्टर के चेहरे की लकीरें बता रहीं थीं कि सब ठीक नहीं है | अगले कुछ दिनों तक उनको होश नहीं था और जब डॉक्टर ने बताया कि बच्चे के दिल में छेद है तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा उनपर |
आज सारी कोशिशों के बाद भी जब वो बच्चे को नहीं बचा पाया तो बुरी तरह टूट गया था | और हस्पताल के बाहर दीवाल से पीठ टिका कर बैठे बैठे देख रहा था कि परछाईयाँ भी ग़मों कि तरह बढ़ रहीं हैं |
एक औसत इन्सान की जिंदगी कुछ छोटी छोटी खुशियों और बड़े बड़े मुश्किलात के बीच हिचखोले खाती रहती है | जब ग़म का समय होता है तो समय ही नहीं बीतता , और खुशियों के पल तो सचमुच पल समान ही होते हैं , कब उड़ जाते हैं , पता ही नहीं चलता | वो भी एक आम इन्सान ही था , पढ़ाई पूरी होने के बाद छोटी सी नौकरी मिल गयी थी तो लगा दुनियाँ जहान की खुशियां मिल गयी हैं | फिर शादी हुई और पहले बच्चे के आने की आहट सुनाई देने लगी | बड़े खुश थे वे , तमाम कल्पनायें कर रहे थे बच्चे के बारे में , नाम क्या रखेंगे , कहाँ पढ़ाएंगे , वगैरह , वगैरह |
आखिर वो दिन भी आ गया और हस्पताल पहुंच गए वे दोनों | रात आँखों में ही बीत गयी और सुबह एक प्यारे से बच्चे का आगमन हुआ उनकी दुनियाँ में | खुशियों का पारावार नहीं रहा उस समय , लेकिन कुछ घंटो बाद भी जब बच्चा सुस्त ही पड़ा रहा तो उन्हें चिंता हुई | डॉक्टर के चेहरे की लकीरें बता रहीं थीं कि सब ठीक नहीं है | अगले कुछ दिनों तक उनको होश नहीं था और जब डॉक्टर ने बताया कि बच्चे के दिल में छेद है तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा उनपर |
आज सारी कोशिशों के बाद भी जब वो बच्चे को नहीं बचा पाया तो बुरी तरह टूट गया था | और हस्पताल के बाहर दीवाल से पीठ टिका कर बैठे बैठे देख रहा था कि परछाईयाँ भी ग़मों कि तरह बढ़ रहीं हैं |
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