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Thursday, June 12, 2014

पीड़ा

खा लो बेटा , थोड़ा तो खा लो , रमा अपने छोटे बेटे के पीछे पीछे खाना ले कर घूम रही थी , लेकिन बेटा किसी भी सूरत में खाने को तैयार नहीं था | बड़ी मशक्कत के बाद उसने थोड़ा सा खाया और बाक़ी खाना प्लेट में छोड़ दिया | रमा बहुत दुःखी थी उसके इस आदत से |
अगले दिन जब स्कूल से बेटे को लेकर आते समय रास्ते में सड़क के किनारे एक बच्चे को पेपर के टुकड़े में कुछ खाते देखकर रमा भौचक्क रह गयी | गरीबी और भूख क्या नहीं करा देती , उसका मन पीड़ा से भर गया | फिर कुछ सोचकर उसने बेटे को उस तरफ दिखाया और बोली "बेटा देख , जिन्हे खाना नहीं मिलता है वो कहीं भी , कुछ भी खाने को तैयार हो जाते हैं और तुम खाना बर्बाद कर देते हो "|
पता नहीं क्या लगा बेटे को , लेकिन उसने खाना बर्बाद करना बंद कर दिया | शायद उस भूखे बच्चे की पीड़ा उसके बाल मन को भी छू गयी थी |

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