सावन आया देख के , उठा जो मन में वेग
चारो सखियाँ मिल गयीं , लगी लगाने पेंग
लगी लगाने पेंग , छुईं जब पेंड़ की डारी
चलने लगी समीर तभी कस के मतवारी
हर्षित हुआ किसान देख के मौसम प्यारा
लगने लगा नवीन उन्हें ये जग अब सारा
चारो सखियाँ मिल गयीं , लगी लगाने पेंग
लगी लगाने पेंग , छुईं जब पेंड़ की डारी
चलने लगी समीर तभी कस के मतवारी
हर्षित हुआ किसान देख के मौसम प्यारा
लगने लगा नवीन उन्हें ये जग अब सारा
No comments:
Post a Comment