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Wednesday, July 15, 2015

प्यार का दरिया-

प्यार का दरिया , सागर में न मिला सके
चाहा बहुत हमने , पर तुम्हे न भुला सके
ख़लिश बहुत है इश्क़ में , अब हमने जाना
दर्द का पहाड़ है , और पत्थर न हिला सके
वो होठों की जुम्बिश , वो नज़रों के तीर
भरा रहा ज़ाम , हम उन्हें न पिला सके
बाँट लें अब मिलकर , एक दूसरे के ग़म
खुशियाँ बहुत थीं पर उन्हें न दिला सके !!
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प्यार का दरिया , सागर में मिला न सके
आज़माइसें भी कीं , तुझे भुला न सके
ख़लिश इश्क़ में इब्तदा ए जानम
नस्तर दर्द का निज़ात , दिला न सके
वो होठों की ज़ुम्बिश , वो नज़रों के तीर
नज़र दिल का नज़्म , पिला न सके
चलो बाँट लें गम , अब एक दूजे का
हसींन पल ख़ुशियों का , दिला न सके !!

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