" कितना भी समझाओ , सुनता ही नहीं है ये छोकरा ", चचा भन्नाए हुए थे | छोकरा भी बिलकुल हठी था , बार बार गंगू के घर चला जाता था और वहीँ खेलता और खाता |
चचा पाँचो बख़त के नमाज़ी थे और किसी गैर मज़हबी के यहाँ का पानी पीना भी क़ुबूल नहीं था उनको | लेकिन इस बच्चे का क्या करें , उसकी वालिदा उसे २ साल का छोड़ कर ही अल्लाह को प्यारी हो गयीं और लोगों के बहुत कहने पर भी वो दुबारा निकाह करने को राज़ी नहीं हुए |
यही सब सोचते वो गंगू के घर के सामने पहुंचे और आवाज़ लगाने वाले ही थे कि नज़र सोते हुए बच्चों पर पड़ी | उनका बच्चा उस घर के बच्चों के साथ बड़े सुकून की नींद सो रहा था | गौर से भी देखने पर भी उनको उन बच्चों में कोई फ़र्क़ नज़र नहीं आया |
उन्होंने दरवाज़े पर रखा लोटा उठाया और अपने हलक़ से " गंगा जमुनी " की धारणा को नीचे उतारने लगे |
चचा पाँचो बख़त के नमाज़ी थे और किसी गैर मज़हबी के यहाँ का पानी पीना भी क़ुबूल नहीं था उनको | लेकिन इस बच्चे का क्या करें , उसकी वालिदा उसे २ साल का छोड़ कर ही अल्लाह को प्यारी हो गयीं और लोगों के बहुत कहने पर भी वो दुबारा निकाह करने को राज़ी नहीं हुए |
यही सब सोचते वो गंगू के घर के सामने पहुंचे और आवाज़ लगाने वाले ही थे कि नज़र सोते हुए बच्चों पर पड़ी | उनका बच्चा उस घर के बच्चों के साथ बड़े सुकून की नींद सो रहा था | गौर से भी देखने पर भी उनको उन बच्चों में कोई फ़र्क़ नज़र नहीं आया |
उन्होंने दरवाज़े पर रखा लोटा उठाया और अपने हलक़ से " गंगा जमुनी " की धारणा को नीचे उतारने लगे |
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