हौसला है किसान में
सदियाँ बीत गयीं
पर अब भी लड़ रहा है
प्रकृति से
अक्सर पड़ जाता है
कमज़ोर अपनी लड़ाई में
पर फिर उसी जोश
और उम्मीद से
जुट जाता है अपने उद्यम में
चीर कर धरती का सीना
बोता है बीज , उम्मीदों के , सपनो के
उगाने के लिए फ़सल संतुष्टि की
प्रकृति भी लेती है
उसी का इम्तहान
जो नहीं करता है
कभी भी प्रतिकार
बार बार हारता है वो
पर नहीं छोड़ता हौसला !!
सदियाँ बीत गयीं
पर अब भी लड़ रहा है
प्रकृति से
अक्सर पड़ जाता है
कमज़ोर अपनी लड़ाई में
पर फिर उसी जोश
और उम्मीद से
जुट जाता है अपने उद्यम में
चीर कर धरती का सीना
बोता है बीज , उम्मीदों के , सपनो के
उगाने के लिए फ़सल संतुष्टि की
प्रकृति भी लेती है
उसी का इम्तहान
जो नहीं करता है
कभी भी प्रतिकार
बार बार हारता है वो
पर नहीं छोड़ता हौसला !!
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