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Friday, July 24, 2015

दिल ने आराम किया--

मज़हब को समझें इस कोशिश में न कभी आराम किया
जिन हाथों में क़लम थी कभी , उनसे क़त्ले आम किया
फिक्र उन्हें है बनें हमारे , मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे
खिल जाये इक इन्सां भी , ना ऐसा कोई काम किया
आओ खोजें इस दुनियाँ में , मिलती है हर ओर नज़ीर
सजदे में ही मिले रहीम ,जो सुबह से लेकर शाम किया
कितना मुश्किल था पाना इस गम से दिल को छुटकारा
सदियोँ से तरसे थे लेकिन , अब दिल ने आराम किया
उनका भी शुकराना करलें , लाये जो इस दुनियाँ में
घूम घूम कर दुनियाँ में जब , यीशु , अल्ला , राम किया
तुझको पाने की चाहत में , गँवा दिया सब चैनों सुकूँ
रात को रो-रो सुबह किया, या दिन को ज्यों-त्यों शाम किया
दिल को इतने जख्म मिले पर गिला कभी ना किया विनय
खुशियां दे डाली सबको , बस गम को अपने नाम किया !!
 

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