वफ़ाओं का मेरी सिला दीजिये
हूँ बेहोश मुझको जिला दीजिये
हुआ हूँ मैं गुम इस ज़माने में लेकिन
मुझी को मुझी से मिला दीजिये
कुचलते रहे हैं सदा हर कली को
किसी फूल को अब खिला दीजिये
मिला इस ज़माने में हर कोई खारा
ज़रा अब अमिय भी पिला दीजिये
सज़ा तो बहुत मिल गयी है मुझे अब
वो ख़्वाबों की मंज़िल दिला दीजिये !!
हूँ बेहोश मुझको जिला दीजिये
हुआ हूँ मैं गुम इस ज़माने में लेकिन
मुझी को मुझी से मिला दीजिये
कुचलते रहे हैं सदा हर कली को
किसी फूल को अब खिला दीजिये
मिला इस ज़माने में हर कोई खारा
ज़रा अब अमिय भी पिला दीजिये
सज़ा तो बहुत मिल गयी है मुझे अब
वो ख़्वाबों की मंज़िल दिला दीजिये !!
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