" सोच रहा हूँ बेटे के यहाँ हो लूँ , तुम भी चलोगी ना ", जवाब जानते हुए भी उन्होंने पूछा |
" तुम ही चले जाओ , मेरा मन नहीं है ", मन ही मन पोते को देखने की जबरदस्त इच्छा के बावजूद उसने मना कर दिया |
" ठीक है , तब मैं ही चला जाता हूँ ", कह तो दिया उन्होंने लेकिन पिछली बार का दृश्य आँखों के सामने घूम गया |
" आगे से ये लोग आएंगे तो सर्वेंट क्वार्टर में ही ठहराना , कोई सलीका नहीं हैं इनको , पूरा कार्पेट बर्बाद कर दिया ", बहू की आवाज़ आई और घर में सन्नाटा छा गया |
रात में काफी देर से बेटा आया और उसने खाट पर पैताने बैठ कर इतना ही कहा " पिताजी , मैंने कहा था ना कि इतने ऊँचे घर में रिश्ता मत जोड़ो "|
" तुम ही चले जाओ , मेरा मन नहीं है ", मन ही मन पोते को देखने की जबरदस्त इच्छा के बावजूद उसने मना कर दिया |
" ठीक है , तब मैं ही चला जाता हूँ ", कह तो दिया उन्होंने लेकिन पिछली बार का दृश्य आँखों के सामने घूम गया |
" आगे से ये लोग आएंगे तो सर्वेंट क्वार्टर में ही ठहराना , कोई सलीका नहीं हैं इनको , पूरा कार्पेट बर्बाद कर दिया ", बहू की आवाज़ आई और घर में सन्नाटा छा गया |
रात में काफी देर से बेटा आया और उसने खाट पर पैताने बैठ कर इतना ही कहा " पिताजी , मैंने कहा था ना कि इतने ऊँचे घर में रिश्ता मत जोड़ो "|
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