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Wednesday, September 23, 2015

अन्जाना भय--

रोज की ही तरह आज भी ऑफिस से निकलने में उसे देर हो गयी थी । तीन साधन बदलकर वो अपने कॉलोनी के बाहर उतर कर जल्दी जल्दी घर की तरफ चल दी । काफी अँधेरा हो गया था और अचानक बिजली भी गुल हो गयी । 
न जाने क्यूँ उसे सुबह का अखबार याद आ गया । पहले पन्नें पर खबर थी कि एक छोटी बच्ची की अस्मत कुछ दरिन्दों ने लूटी । अब कॉलोनी के रास्ते के दोनों ओर खड़े पेंड़ उसे एकदम से डरावने लगने लगे । अचानक किसी के पैरों की आहट से वो बुरी तरह घबरा गयी और उसके मुँह से चीख़ निकल गयी । 
" क्या हुआ , इतनी घबराई हुई क्यूँ हो , कुछ हुआ क्या ?, आवाज़ उसके पति की थी । 
वो एकदम से उससे लिपट गयी , पति को कुछ समझ नहीं आया । अभी तो उसका डर निकल गया लेकिन कल फिर रात होगी , अँधेरा होगा और वो अन्जाना भय फिर घेर लेगा ।

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