" भाभी , बहुत अच्छी साड़ी है ये | आप लोग कितना ध्यान रखते हैं मेरा ", छोटी बहन ने दोनों हाथों से साड़ी लेते हुए कहा तो अम्मा के सामने पिछले साल का दृश्य घूम गया |
" ऐसी साड़ी तो मेरे यहाँ कामवाली भी नहीं पहनती , रखिये अपने पास | राखी बाँधने आई हूँ तो रस्म अदायगी करने लगी आप ", और साड़ी को छुआ तक नहीं बड़ी बहन ने | बड़ी मुश्किल से भैया ने उनको २५०० देकर मनाया था |
छोटी ने आकर अम्मा का पैर छुआ और धीरे से ५०० निकाल कर उनके हाँथ में रख दिया | काश बाबूजी होते , सोचते हुए अम्मा की आँख भर गयी | लेकिन उनको अपनी छोटी बेटी गरीब घर में होते हुए भी बहुत अमीर लग रही थी |
" ऐसी साड़ी तो मेरे यहाँ कामवाली भी नहीं पहनती , रखिये अपने पास | राखी बाँधने आई हूँ तो रस्म अदायगी करने लगी आप ", और साड़ी को छुआ तक नहीं बड़ी बहन ने | बड़ी मुश्किल से भैया ने उनको २५०० देकर मनाया था |
छोटी ने आकर अम्मा का पैर छुआ और धीरे से ५०० निकाल कर उनके हाँथ में रख दिया | काश बाबूजी होते , सोचते हुए अम्मा की आँख भर गयी | लेकिन उनको अपनी छोटी बेटी गरीब घर में होते हुए भी बहुत अमीर लग रही थी |
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