पहचान का द्वन्द--
" बधाई हो, समाजसेवा के इन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए| आप जैसे विरले लोग ही हैं जो तवायफ़ों के बेसहारा बच्चों की देखभाल में अपना जीवन लगाये हुए हैं "|
"जी, शुक्रिया, हम लोग तो बस इस बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के कार्य में लगे हुए हैं "|
शायद अब उनके अतीत का जिक्र लोग छोड़ दे, यही सोचते हुए वो लोगों से बधाई स्वीकार कर रहे थे कि एक आवाज़ उनके कान में पड़ी " अरे अगर तवायफ़ का बेटा ही ऐसे बच्चों का ख्याल नहीं रखेगा तो और कौन रखेगा "|
एकबारगी तो उनके मन में एक टीस सी उठी, लेकिन फिर उन्हें अपनी पहचान का द्वन्द ख़त्म होता दिखने लगा|
" बधाई हो, समाजसेवा के इन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए| आप जैसे विरले लोग ही हैं जो तवायफ़ों के बेसहारा बच्चों की देखभाल में अपना जीवन लगाये हुए हैं "|
"जी, शुक्रिया, हम लोग तो बस इस बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के कार्य में लगे हुए हैं "|
शायद अब उनके अतीत का जिक्र लोग छोड़ दे, यही सोचते हुए वो लोगों से बधाई स्वीकार कर रहे थे कि एक आवाज़ उनके कान में पड़ी " अरे अगर तवायफ़ का बेटा ही ऐसे बच्चों का ख्याल नहीं रखेगा तो और कौन रखेगा "|
एकबारगी तो उनके मन में एक टीस सी उठी, लेकिन फिर उन्हें अपनी पहचान का द्वन्द ख़त्म होता दिखने लगा|
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