अपने पेशे में कभी भी रश्मि को इतनी परेशानी नहीं आई थी, एकदम से उलझ के रह गयी थी वो| महिला डॉक्टर होने के चलते बहुत से डिलीवरी के केस आते थे और उतने ही एबॉर्शन के, लेकिन ये केस तो कुछ अजीब ही था| जब वो महिला उसके पास आई तो उसे भी पता नहीं था कि इतनी समस्या हो सकती है| स्वास्थ्य खराब था उसका लेकिन अमूमन गरीब घरों की औरतों का यही हाल रहता है, सोचकर उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया| बच्चे का विकास ठीक ही लग रहा था लेकिन उसके पीले चेहरे को देखते हुए उसने उसे कुछ आयरन की गोलियां दे दी और खून की जाँच के लिए भी लिख दिया| उसका पहला बच्चा था और वो किसी भी कीमत पर उसे जन्म देना चाहती थी| बातों बातों में ही वो बोली " डॉक्टर साहब, पहला बच्चा है और काफी दिन बाद हो रहा है| जरा ध्यान रखिएगा, बहुत पैसा नहीं है हमारे पास "|
रश्मि ने सोचा कि इसके परिवार के बारे में भी पता लगाया जाए, क्योंकि उसका पति साथ नहीं आया था। पूछने पर उसने बताया कि उसका पति कहीं बाहर काम करता है और साल में दो बार आता है| किसी फैक्ट्री में काम करता है और वहाँ अकेले ही रहता है, कुछ पैसे भेजता रहता है जिससे खर्च चल जाता है। वो भी कुछ घरों में काम कर लेती है और इस तरह जिंदगी कुछ शिकायतों और छोटी छोटी खुशियों के सहारे बीत रही है।
खैर कुछ देर बात करके वो चली गयी और रश्मि भी दूसरे मरीजों को देखने में उलझ गयी। अगले दिन तक ब्लड टेस्ट की जानी थी और उसके बाद कुछ और दवाईयाँ देनी पड़ें शायद,रश्मि ने यही सोचा था।
लेकिन उसकी रिपोर्ट ने एकदम से हिला दिया उसे| रश्मि ने एच आई वी टेस्ट के लिए भी लिख दिया था, जो कि आजकल एक रूटीन सा हो गया था। सामान्यतयाः ये टेस्ट नेगेटिव ही होती थी लेकिन इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव थी और बच्चे में भी संक्रमण होने की पूरी उम्मीद थी| लगभग छह महीने बीत चुके थे और ऐसे में बच्चे का एबॉर्शन बहुत मुश्किल था| लेकिन उसे जन्म देना भी उतना ही मुश्किल लग रहा था रश्मि को| उसके नंबर पर फोन करके रश्मि ने बुलाया और बहुत देर तक कुछ कहने का साहस नहीं जुटा पायी| फिर किसी तरह उसे कुछ विटामिन्स और अन्य दवाएं देकर अगले दिन फिर आने को कह दिया|
उसके जाने के बाद उसने कई सीनियर डॉक्टर्स से राय, मशविरा किया लेकिन हर डॉक्टर उसके बच्चे को लेकर आशंकित था| पूरी रात वो उलझी रही, कैसे बताये कि उसे ये बीमारी है और बच्चे के ऊपर भी खतरा है| लेकिन कोई और रास्ता भी तो नहीं था, रह रह के उसका पीला लेकिन प्रसन्न चेहरा दिखता था|
रश्मि ने सोचा कि इसके परिवार के बारे में भी पता लगाया जाए, क्योंकि उसका पति साथ नहीं आया था। पूछने पर उसने बताया कि उसका पति कहीं बाहर काम करता है और साल में दो बार आता है| किसी फैक्ट्री में काम करता है और वहाँ अकेले ही रहता है, कुछ पैसे भेजता रहता है जिससे खर्च चल जाता है। वो भी कुछ घरों में काम कर लेती है और इस तरह जिंदगी कुछ शिकायतों और छोटी छोटी खुशियों के सहारे बीत रही है।
खैर कुछ देर बात करके वो चली गयी और रश्मि भी दूसरे मरीजों को देखने में उलझ गयी। अगले दिन तक ब्लड टेस्ट की जानी थी और उसके बाद कुछ और दवाईयाँ देनी पड़ें शायद,रश्मि ने यही सोचा था।
लेकिन उसकी रिपोर्ट ने एकदम से हिला दिया उसे| रश्मि ने एच आई वी टेस्ट के लिए भी लिख दिया था, जो कि आजकल एक रूटीन सा हो गया था। सामान्यतयाः ये टेस्ट नेगेटिव ही होती थी लेकिन इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव थी और बच्चे में भी संक्रमण होने की पूरी उम्मीद थी| लगभग छह महीने बीत चुके थे और ऐसे में बच्चे का एबॉर्शन बहुत मुश्किल था| लेकिन उसे जन्म देना भी उतना ही मुश्किल लग रहा था रश्मि को| उसके नंबर पर फोन करके रश्मि ने बुलाया और बहुत देर तक कुछ कहने का साहस नहीं जुटा पायी| फिर किसी तरह उसे कुछ विटामिन्स और अन्य दवाएं देकर अगले दिन फिर आने को कह दिया|
उसके जाने के बाद उसने कई सीनियर डॉक्टर्स से राय, मशविरा किया लेकिन हर डॉक्टर उसके बच्चे को लेकर आशंकित था| पूरी रात वो उलझी रही, कैसे बताये कि उसे ये बीमारी है और बच्चे के ऊपर भी खतरा है| लेकिन कोई और रास्ता भी तो नहीं था, रह रह के उसका पीला लेकिन प्रसन्न चेहरा दिखता था|
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