सुघरी गोबर पाथ कर उठी और उसी हाथ से लटक आये बाल को ठीक करते हुए हाथ धोने चल दी| खूँटा पर बंधी गइया उसको देख कर हुलसी तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी| दूर से ही उसने उसे पुचकारा तो उसने भी अपना सर हिला कर प्यार जतलाया| वो बाल्टी की तरफ बढ़ी और बैठ कर लोटा से पानी निकाल कर हाथ धोने लगी| सब कुछ रोज जैसा ही था, रग्घू ठाकुर के खेत में गोड़ाई करने गया था और बेटी उन्हीं के घर बर्तन मांजने| उसे स्कूल भेजने की न तो हिम्मत थी और न ही इच्छा और वो घर के काम में थोड़ी मदद भी कर देती थी| आखिर उसे भी किसी और के घर ही तो जाना था शादी के बाद|
हाथ धोकर सुधरी उठी तभी बेटी दौड़ते हुए दलान में घुसी| उसके हाथ में एक पैकेट था और उसका चेहरा काफी प्रसन्न दिख रहा था| वो अभी कुछ पूछती तभी बेटी हाँफते हुए बोली " माई, जानत हो आज का मिला है हमका, मिठाई और पकौड़ी भी "|
सुधरी ने सोचा जरूर कोई त्यौहार होगा उनका, क्योंकि उसे तो किसी त्यौहार के बारे में याद नहीं था| उसने थोड़े आश्चर्य से पूछा " कौने बात पर इ मिठाई और पकौड़ी दिया हैं तुमको, हमका तो कउनो त्यौहार याद नहीं है "|
" अरे आज सबेरे ठकुराइन क बिटिया शहर से आई और उसने खूब मिठाई और गिफट अपने माई को दिया| उ का तो कहत रही कि आज मदर डे हौ और आज माई के लिए बहुत ख़ुशी क दिन हौ ", बेटी ने अपने रौ में बोलते हुए अखबार खोल कर उसके सामने रख दिया| सुधरी ने उसमे से एक मिठाई और पकौड़ी निकाल कर रग्घू के लिए रख दिया और बची हुई एक मिठाई से एक छोटा सा टुकड़ा लेकर बाकी सब बेटी को खिला दिया| फिर उठकर एक लोटा पानी निकाल कर बेटी के सामने रख दिया|
बेटी मिठाई और पकौड़ी खाकर पानी पी रही थी, सुघरी उठकर लकड़ी तोड़कर चूल्हा पर रख रही थी| उसे खाना पकाना था बेटी और रग्घू के लिए| उधर ठाकुर के घर ठकुराइन को केक और मिठाईयों के साथ गिफ्ट भी मिल रहा था, आखिर आज मदर डे जो था|
हाथ धोकर सुधरी उठी तभी बेटी दौड़ते हुए दलान में घुसी| उसके हाथ में एक पैकेट था और उसका चेहरा काफी प्रसन्न दिख रहा था| वो अभी कुछ पूछती तभी बेटी हाँफते हुए बोली " माई, जानत हो आज का मिला है हमका, मिठाई और पकौड़ी भी "|
सुधरी ने सोचा जरूर कोई त्यौहार होगा उनका, क्योंकि उसे तो किसी त्यौहार के बारे में याद नहीं था| उसने थोड़े आश्चर्य से पूछा " कौने बात पर इ मिठाई और पकौड़ी दिया हैं तुमको, हमका तो कउनो त्यौहार याद नहीं है "|
" अरे आज सबेरे ठकुराइन क बिटिया शहर से आई और उसने खूब मिठाई और गिफट अपने माई को दिया| उ का तो कहत रही कि आज मदर डे हौ और आज माई के लिए बहुत ख़ुशी क दिन हौ ", बेटी ने अपने रौ में बोलते हुए अखबार खोल कर उसके सामने रख दिया| सुधरी ने उसमे से एक मिठाई और पकौड़ी निकाल कर रग्घू के लिए रख दिया और बची हुई एक मिठाई से एक छोटा सा टुकड़ा लेकर बाकी सब बेटी को खिला दिया| फिर उठकर एक लोटा पानी निकाल कर बेटी के सामने रख दिया|
बेटी मिठाई और पकौड़ी खाकर पानी पी रही थी, सुघरी उठकर लकड़ी तोड़कर चूल्हा पर रख रही थी| उसे खाना पकाना था बेटी और रग्घू के लिए| उधर ठाकुर के घर ठकुराइन को केक और मिठाईयों के साथ गिफ्ट भी मिल रहा था, आखिर आज मदर डे जो था|
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