'भा कटे ' ये आवाज सुनते ही मन पुरानी यादों में खो गया | जाड़े के मौसम में पतंग उड़ाना , कटी हुई पतंगों के पीछे उनको लूटने के लिए दौड़ना और सबकी पतंग काटने की कोशिश करना | वो भी क्या दिन होते थे | लेकिन गांव पर बेटे के पूछे एक सवाल ने कई नए सवाल खड़े कर दिए " डैडी ये बच्चे पतंगों के पीछे क्यों भागते हैं ? इस धूल और मिटटी में नंगे पैर भाग दौड़ करना इन्हे अच्छा कैसे लगता है "
महानगर में रहने वाला मेरा बेटा क्या जाने की पतंग उड़ाने और लूटने का क्या मजा है | वो तो सारे गेम्स कंप्यूटर पर ही खेल लेता है | उसके लिए तो फंतासी की दुनिया ही असली दुनिया है | शायद हम लोगों ने इनका बचपन इनको महसूस ही नहीं करने दिया | ढेर सारी सुविधाएँ देने के चक्कर में हमने उनसे उनका बचपन ही शायद छीन लिया है |
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