पहली बार ये महसूस हुआ था कि हकीकत की दुनिया कितनी अलग होती है | हॉस्टल में रहते हुए जिंदगी और दुनिया के बारे में जो कुछ भी पढ़ा था , जाना था और महसूस किया था , वो सब कितना अलग और बेहतर था | दोस्त , सिर्फ दोस्त होते थे , और कुछ नहीं | कभी भी किसी के भी साथ खाना , पीना | किसी के भी रूम में जाना , कोई रोक टोक नहीं | कभी सोचा ही नहीं कि इंसानो में भी इतना फर्क हो सकता है |
अपने गांव के एक दोस्त की शादी में जाने का बुलावा था और पूरी तैयारी हो गयी थी जाने की | मगर दादाजी का एक ही वाक्य दुनिया के बारे में जाने क्या क्या समझा गया " घूमना फिरना तो बर्दास्त कर लिया , और अब उसकी शादी में जाओगे , कुछ तो घर की इज्जत का ध्यान रखो | उन लोगो के घर हम पानी भी नहीं पीते " लेकिन इसने भविष्य में इन सब के खिलाफ आवाज उठाने का सबक भी दे दिया |
विनय
अपने गांव के एक दोस्त की शादी में जाने का बुलावा था और पूरी तैयारी हो गयी थी जाने की | मगर दादाजी का एक ही वाक्य दुनिया के बारे में जाने क्या क्या समझा गया " घूमना फिरना तो बर्दास्त कर लिया , और अब उसकी शादी में जाओगे , कुछ तो घर की इज्जत का ध्यान रखो | उन लोगो के घर हम पानी भी नहीं पीते " लेकिन इसने भविष्य में इन सब के खिलाफ आवाज उठाने का सबक भी दे दिया |
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