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Tuesday, January 7, 2014

आरक्षण

आरक्षण 
दीपू ने आते ही बहुत निरासा भरे शब्दों में कहा "अब तो इस गांव में प्रधानी भी गयी हम लोगों के पास से " 
क्यों , ऐसा क्या हो गया , कोई नयी समस्या आ गयी क्या , अशोक ने पूछा |
आपको पता नहीं है कि हमारे गांव की सीट अब सामान्य नहीं रही , अब यह सीट आरक्षित हो गयी है | अब तो यहाँ वो लोग प्रधान बनेंगे जो हमारे सामने कभी खटिया पर भी नहीं बैठते थे |
अरे पागल , हमारा हरवाह किसनवा कब काम आएगा | इलेक्शन में अब वही हमारी तरफ से खड़ा होगा और उसके जीतने के बाद प्रधानी तो हमीं करेंगे |
अशोक ने मुस्कुरा कर आरक्षण पर एक और सवाल खड़ा कर दिया |
महापरिनिर्वाण दिवस पर सादर |
विनय

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