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Tuesday, January 7, 2014

किसान

इस बार तो छिम्मी (मटर) की फसल बढ़िया है , आदित्य चच्चा अपने मन में सोचते हुए खेत के मेड़ पर खड़े थे | किसी सूदखोर के पास कर्जे के लिया हाथ नहीं पसारना पड़ेगा , यही सोच कर मन ही मन प्रसन्न हो रहे थे क्योंकि लड़की का गौना करना था इस साल और खेती ही कमाई का एकलौता जरिया था , जो कि आम तौर पर छोटे और मझौले खेतिहरों के पास होता है | बड़का किसी तरह इन्टर पास करके बेरोजगार था और छोटका अभी ८वी में ही पढ़ रहा था | 
रात में घर आकर खाना खाते हुए मेहरारू से बोले " अबकी सब सामान क लिस्ट पहिलही से तैयार रखना | छिम्मी बिचाते ही गौना का साईत निकाल कर बिटिया की बिदाई करनी है "| पाला जम के पड़ने लगा था और दुआर पर जलने वाला कउड़ा भी बुझ गया था | कल रात में खेत में पानी भी बराना (सिचाई) है ,यही सब सोचते हुए न जाने कब रजाई में उनकी आँख लग गयी और आज खेत अगोरने के लिए वो नहीं जा पाये |
अचानक सुबह ४ बजे आँख खुली और चच्चा घबरा कर खेत कि ओर भागे , लेकिन तब तक नीलगाय ने उनके सारे सपनो को दहींज (रौंद) दिया था | अब गौना कैसे करेंगे ये सोच सोच कर चच्चा खेत में ही कपार (सर) पकड़ कर बैठ गए और उनके आँखों से टूटे हुए सपने खून कि तरह बहने लगे |
विनय

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