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Wednesday, January 8, 2014

उम्मीद

"आप से तो कम से कम ये उम्मीद नहीं थी"| उस ग्राहक के कहे इन शब्दो ने अंदर ही अंदर झँझोड़ के रख दिया | मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे रिएक्ट करूँ | फिर मैंने उसे समझाते हुए बैठने के लिए कहा और पूछा कि मैंने ऐसा क्या गलत कह दिया | उसने बहुत ही भरे शब्दों में कहा " मुझे ये पता है कि आप भी हमारी तरह हैं , लेकिन सब जगहों से दुत्कारे जाने के बाद जब हम आप के पास आते हैं तो एक सुकून सा मिलता है कि चलो एक जगह तो है जहाँ पर हमें इंसानो जैसा व्यव्हार मिलता है लेकिन आज आप ने भी इतने ख़राब लहजे में बात की तो कही अंदर से तकलीफ हुई"| दरअसल मैं किसी वजह से तनाव में था और मैंने काफी रूखे शब्दो में बात की थी | ये कोई बड़ी बात तो नहीं होनी चाहिए थी , लेकिन मुझे ये समझ में आ गया कि सार्वजनिक जीवन में आपके अपने तनाव आपके व्यवहार में परिलक्छित नहीं होने चाहिए और आम आदमी के द्वारा लगाये गए उम्मीदो को तोड़ने का हक़ हमें नहीं है | और मैंने उससे छमा मांग ली |
विनय


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