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Tuesday, January 7, 2014

विकलाँग

World Disability Day 3rd Dec 2013 
मैं चला जाता हूँ स्टेटमेंट जोनल ऑफिस में जमा करने , डी पी कि आवाज सुनते ही मैंने पलट कर देखा | एक थप्पड़ सा लगता हुआ महसूस हुआ मुझे | दरअसल थोड़ी देर पहले ही मैंने सभी ऑफिसर्स से पूछा था कि कौन जायेगा जोनल ऑफिस स्टेटमेंट्स को लेकर और सभी लोग कुछ न कुछ बहाने बना रहे थे | ब्रांच से जोनल ऑफिस कि दूरी करीब २५ किलोमीटर थी और लोकल ट्रैन में धक्के खाते हुए जाना , फिर उसके बाद स्टेशन से लगभग ८०० मी तक जाना , फिर चार मंजिल ऊपर ऑफिस पहुच कर स्टेटमेंट जमा करना और वहाँ पर २-३ घंटा इंतजार करना , यह सोच कर सभी बचने का रास्ता ढूंढ़ रहे थे | मैंने कहा कि तुम और जवाब मिला कि मैं क्यों नहीं जा सकता |
डी पी हमारे ब्रांच में ही एक ऑफिसर था जिसका एक पैर घुटनो के ऊपर तक कटा हुआ था | वह खुद के ऑटो से ब्रांच आता था और बैसाखी से चलता था | फिर वही स्टेटमेंट लेकर जमा करने गया और मैं ये सोचता रह गया कि वास्तव में अपाहिज कौन था ?
डी पी से छमा याचना सहित क्यूंकि शायद उसे ये अच्छा न लगे |
विनय

विकलाँग 

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