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Tuesday, January 7, 2014

जड़ें--

" दादाजी दादाजी , ये पेड़ सूख कैसे गया | हम लोगो ने कितना ध्यान रखा था इसका "| छोटा मोनू अपने दादाजी से बड़ी हैरानी से पूछ रहा था | दादाजी ने उसे समझाते हुए कहा " बेटा कोई भी पेड़ , पौधा अपनी ज़मीन से उखड़ने के बाद शायद ही फिर से पनप पाता है | अपनी जड़ों से अलग होने के बाद फिर से जीना आसान नहीं होता बेटा "|
उसे पिछले हफ्ते कि बात याद आ गयी जब पिता जी ने उससे कहा था कि काफी दिन हो गए , अब वापस अपने गांव जाना चाहता हूँ | अपनी तरफ से तो वह उनका पूरा ख्याल रखने की कोशिश कर रहा था , पर शायद अपनी जड़ों से अलग होकर जीना आसान नहीं होता |

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