आखिर क्यूँ हम इतने बड़े हो गए
बचपन के दिन जाने कहाँ खो गए
वो खेलना जम के आइस पाईस
गुल्ली डंडा और लट्टू की ख़्वाहिश
दोपहर में लगती लूडो की बाज़ी
खूब खेलते थे हम चोर सिपाही
खेलते खेलते , हम वहीँ सो गए
बचपन के दिन जाने कहाँ खो गए
वो टायर को ले के दोपहर में दौड़ना
वो घरों के काँच को बेहिचक तोड़ना
नहाने के लिए था पोखर का पानी
सुनना नानी से परियों की कहानी
गर्मियों की छुट्टी के , वो प्यारे पल
काश मिलता एक बार फिर वो कल
उन पलों की याद में फिर से रो दिए
बचपन के दिन जाने कहाँ खो गए !!
बचपन के दिन जाने कहाँ खो गए
वो खेलना जम के आइस पाईस
गुल्ली डंडा और लट्टू की ख़्वाहिश
दोपहर में लगती लूडो की बाज़ी
खूब खेलते थे हम चोर सिपाही
खेलते खेलते , हम वहीँ सो गए
बचपन के दिन जाने कहाँ खो गए
वो टायर को ले के दोपहर में दौड़ना
वो घरों के काँच को बेहिचक तोड़ना
नहाने के लिए था पोखर का पानी
सुनना नानी से परियों की कहानी
गर्मियों की छुट्टी के , वो प्यारे पल
काश मिलता एक बार फिर वो कल
उन पलों की याद में फिर से रो दिए
बचपन के दिन जाने कहाँ खो गए !!
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