जोहानसबर्ग निवास के दौरान बहुत तरह के अनुभव हुए हैं और एक ऐसा अनुभव भी मिला , जो शायद कोई नहीं लेना चाहता , मैं भी नहीं चाहता था । २८ मई को हमेशा की तरह बैंक जा रहा था , रास्ते में ट्रैफिक थोड़ा ज्यादा था और कार की गति काम थी । अचानक सामने वाली कार ने ब्रेक लगाया और उसकी वज़ह से मैंने भी ब्रेक लगा दिया । मेरे पीछे वाला , जो शायद कुछ सोच रहा था या किसी और वज़ह से , ब्रेक नहीं लगा पाया । वैसे उसने अपनी कार को किनारे मोड़ने की कोशिश की थी लेकिन फिर भी दुर्घटना घट गयी । उसकी कार ने पीछे से टक्कर मार दी और मैं घबरा कर नीचे उतरा । कार का पीछे का बम्पर टूट गया था , लेकिन गति के काम होने की वजह से हम दोनों को ही कोई चोट नहीं आई । पिछली कार वाला भी तुरंत निकला और मुझसे आकर क्षमा माँगने लगा । खैर मैंने उसे कहा कि कोई बात नहीं , ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है । मुश्किल से ५ मिनट बीते होंगे कि पुलिस की कार भी आ गयी । उन्होंने पूछा कि कोई चोट वगैरह तो नहीं लगी और हमारे नहीं कहने पर वो निकट के पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने की सलाह देकर चले गए । इस बीच में कुछ और गाड़ियाँ भी आ गयीं तो कि किसी भी दुर्घटना के होने पर तुरंत पहुँच जाती हैं । उनके बताने पर हमने बीमा कंपनी को तुरंत सूचित किया और एक दूसरे का डिटेल जैसे कार का न., लाइसेंस , बीमा इत्यादि का आदान प्रदान किया । इसी बीच बीमा कंपनी ने हमारी गाड़ी को ले जाने का इंतज़ाम किया और फिर मैं पुलिस स्टेशन रिपोर्ट लिखाने चल दिया । बिना किसी दिक्कत के बड़े अदब से पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट लिखी गयी और उन्होंने मुझे एक एक्नालेग्मेंट भी दिया जिसपर दिया गया नंबर बीमा कंपनी को बताना था ।
कभी कभी बहुत कायदे कानून भी परेशानी का सबब बन जाते हैं , अब मुझे उसका नमूना दिखाई पड़ने लगा । मैंने बीमा कंपनी को फोन करके बताया कि रिपोर्ट लिखवा दी गयी है और उसका न. भी दे दिया । उन्होंने बड़ी प्रसन्नता से कहा की आपकी कार को हमने मरम्मत के लिए भेज दिया है , अब मरम्मत वाली कंपनी उसको देख कर कितना खर्च आएगा , इसका एस्टीमेट देगी और इसमें चार वर्किंग डेज लगेंगे । खैर पांचवें दिन मेरे पास फोन आया कि ( ईमेल तो आता ही रहता है ) एस्टीमेट अप्प्रोवे हो गया है , आप अपना पासपोर्ट और लाइसेंस की कॉपी भेज दीजिये । मैंने तुरंत भेज दिया , फिर उनका मेल आया की कार को मरम्मत के लिए भेज दिया गया है और उसकी प्रगति से आपको अवगत करते रहेंगे । मैंने पूछा कि लगभग कितने दिन लग जायेंगे इसमें तो उनका जवाब था लगभग १५ वर्किंग डेज । आज लगभग १५ दिन हो गए हैं , दो दिन पहले फोन और मेल दोनों आया था कि पार्ट्स बदल दिए गए हैं , अब कार पैनल बीटर के पास है , इसके बाद पेंट होगा , फिर एक बार और पूरी तरह वो चेक करेंगे और फिर कहीं जाकर मेरी कार मेरे पास आएगी ।
वैसे जितना नुकसान हुआ था कार में , शायद मैं हिन्दुस्तान में होता तो ये सब तीन दिन में हो गया होता और मुझे अपनी कार मिल भी गयी होती । लेकिन इस विकसित देश में अभी और कितना समय लगेगा , पता नहीं । फिलहाल तो घूमना फिरना सब बंद है और आराम चल रहा है ।
कभी कभी बहुत कायदे कानून भी परेशानी का सबब बन जाते हैं , अब मुझे उसका नमूना दिखाई पड़ने लगा । मैंने बीमा कंपनी को फोन करके बताया कि रिपोर्ट लिखवा दी गयी है और उसका न. भी दे दिया । उन्होंने बड़ी प्रसन्नता से कहा की आपकी कार को हमने मरम्मत के लिए भेज दिया है , अब मरम्मत वाली कंपनी उसको देख कर कितना खर्च आएगा , इसका एस्टीमेट देगी और इसमें चार वर्किंग डेज लगेंगे । खैर पांचवें दिन मेरे पास फोन आया कि ( ईमेल तो आता ही रहता है ) एस्टीमेट अप्प्रोवे हो गया है , आप अपना पासपोर्ट और लाइसेंस की कॉपी भेज दीजिये । मैंने तुरंत भेज दिया , फिर उनका मेल आया की कार को मरम्मत के लिए भेज दिया गया है और उसकी प्रगति से आपको अवगत करते रहेंगे । मैंने पूछा कि लगभग कितने दिन लग जायेंगे इसमें तो उनका जवाब था लगभग १५ वर्किंग डेज । आज लगभग १५ दिन हो गए हैं , दो दिन पहले फोन और मेल दोनों आया था कि पार्ट्स बदल दिए गए हैं , अब कार पैनल बीटर के पास है , इसके बाद पेंट होगा , फिर एक बार और पूरी तरह वो चेक करेंगे और फिर कहीं जाकर मेरी कार मेरे पास आएगी ।
वैसे जितना नुकसान हुआ था कार में , शायद मैं हिन्दुस्तान में होता तो ये सब तीन दिन में हो गया होता और मुझे अपनी कार मिल भी गयी होती । लेकिन इस विकसित देश में अभी और कितना समय लगेगा , पता नहीं । फिलहाल तो घूमना फिरना सब बंद है और आराम चल रहा है ।
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